Saturday, 25 February 2012

हम तो इसी में खुश हैं की जल के रौशनी दे पाए

हम तो इसी में खुश हैं की जल के रौशनी दे पाए
दफन भी हो गए तो इस सरजमीं को नमी दे पाए

बला सी ख़ूबसूरत जो आँखे हैं उन्ही की कसम
तेरी वही आँखे थी जो मुझे ये ख्वाब हंसी दे पाए

उसने खेतों में दिन रात खून और पसीने बहायें है
ताकि अपने बच्चों को वो कुछ ग़ज़ ज़मीं दे पाए

वो तो सैयाद है, उसे काम पिंजरों में कैद परिंदों से
कब फडफडाते पंख उसकी आँखों को नमी दे पाए

या खुदा! आज फिर से इंसानियत का क़त्ल हुआ
अब वो वजह ढूंढता हूँ जो तेरे होने का यकीं दे पाए 

12 comments:

Piyush said...

Wah... Kya baat...

Dimple said...

शुक्रिया आपका - आप हमें ये दिल को छुह जाने वाली कविता दे पाए

:)

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

उसने खेतों में दिन रात खून और पसीने बहायें है
ताकि अपने बच्चों को वो कुछ ग़ज़ ज़मीं दे पाए

Bahut Umda....

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

arey huzoor kahaan se laate hain aap itni gehraaiyaan apni lekhnee mein???

again an amazing composition.

mini said...

bahut hi kamaal ki kavita hai........itni gehrai aur dard ke saath mehoos kee gayi bhavnaon ko sambodhit kiya hai aapne apne lehan mein......
haardik badhaai...........

दिगम्बर नासवा said...

उसने खेतों में दिन रात खून और पसीने बहायें है
ताकि अपने बच्चों को वो कुछ ग़ज़ ज़मीं दे पाए ..

बहुत खूब ... अलग अंजाद के शेर ... लाजवाब गज़ल है ..

मत बाँटों इंसान को said...

या खुदा! आज फिर से इंसानियत का क़त्ल हुआ
अब वो वजह ढूंढता हूँ जो तेरे होने का यकीं दे पाए...bahut khoob bahut sundar

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

.


वाह ! आप तो अच्छे-भले शायर हैं जनाब !
बढ़िया रचना … मुबारकबाद!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

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♥ होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार ! ♥
♥ मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !! ♥



आपको सपरिवार
होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
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Fani Raj Mani Chandan said...

many thanks :-)

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

या खुदा! आज फिर से इंसानियत का क़त्ल हुआ
अब वो वजह ढूंढता हूँ जो तेरे होने का यकीं दे पाए

Waah.... Behtreen Panktiyan

डॉ. जेन्नी शबनम said...

सभी शेर बहुत अर्थपूर्ण...

वो तो सैयाद है, उसे काम पिंजरों में कैद परिंदों से
कब फडफडाते पंख उसकी आँखों को नमी दे पाए

बधाई.